इतना तो हक बनता ही है
एक कवि का कि
जब वह मरे तो
मौत को पता हो कि
वह एक कवि को लेने जा रही है।
एक कवि मरे और कहीं एक
कविता न हो
यह तो गलत होगा
वेणुगोपाल
December 30, 2008
वेणुगोपाल जो चुपचाप चले गए
July 30, 2008
सलाम
मैं सलाम करता हूं
आदमी के मेहनत में लगे रहने को
मैं सलाम करता हूं
आने वाले खुशगवार मौसमों को
मुसीबत से पाले गए
पयार जब सफल होंगे
बीते वकतों का बहा हुआ लहु
जिंदगी की धरती से उठा कर
मसतकों पर लगाया जाएगा
( पाश की एक कविता)
September 21, 2007
व्यंग्य मत बोलो
व्यंग्य मत बोलो
काटता है जूता तो क्या हुआ।
पैर में न सही सर पर रख डोलो
व्यंग्य मत बोलो
अंधों का साथ अगर हो जाए तो![]()
आंखे बंद कर लो
जैसे सब टटोलते हैं
राह तुम भी टटोलो
व्यंग्य मत बोलो
क्या रखा है कुरेदने में
हर एक का चकव्यूह कुरेदने में
सत्य का निरस्त टूटा पहिया लेकर
लडने से अच्छा है
जैसी दुनिया है वैसी हो लो
व्यंग्य मत बोलो
भीतर कौन देखता है
बाहर रहो चिकने चिकने
यह मत भूलो यह बाजार है![]()
और सभी यहां आये हैं बिकने
राम राम कहो
और माखन मिसरी घोलो
सवेशवर दयाल सक्सेना