उन संबंधों के नाम जो अब नहीं सताती
बिजली के खंभों की तरह
खड़े थे हम दोनो
दूर से एक दूसरे को देखते
और लोगों को लगता कि
बेज़ान हैं हम दोनो
इतने पास होकर भी
कभी गले न मिल पाये हम दोनो
तुमहें चाहिए था एक आइना
तुमहारी खूबसूरती के लिए
जबकि मैं भटकता रहा
महज एक बतॆन के लिए
रोटी और चांद की लड़ाई में
ऐसे गुम हुए हम कि
गले न मिल पाये हम दोनो
मेरे पांव सरपट भागते थे
खेतों की मेंडों पर
जबकि तुमहें मोच आ जाती थी
उनहीं पगडंडियों पर
हाथ पकड़ कर साथ साथ
कहां तक चल पाते हम दोनो
गले न मिल पाये हम दोनो
मैं उस हवा को चूमना चाहता था
जो तुमहारे जुलफों को उड़ाती थी
तुम परेशान थी उनहीं झोंको से
और उसे मुटठी में कैद करना चाहती थी
हवा का शोर था इतना कि
सुन न पाये कुछ हम दोनो
गले न मिल पाये हम दोनो
तुमने बस इक बार जि़द की
और खिलौनों की तरह तुमहें मिला सूरज
मैं कितनी डालियां चढता रहा तब कहीं
नीम के दरखतों से छनकर मुझे मिला सूरज





