मोट मोट अंखियन से पूछेला बबुआ हमार
कधिया ले धोये पड़ी होटल के गिलास
ई गिलसवा में छलकेला बचपन हमार
करलस के चोरी ऐ साथी सवनवा हमार
एको आंख सोहे न भोर कीरिनिया
सुरूजवा करेला जिनगी में हमरा अंधार
टुकुर अंखियन से ताकेली बचवन के
हमरो के सकूल चाही ऐ भाई डेस किताब
बड़का बुढ़वन खेलेला खेल कमाल
हमरा खेले पे लागल बा काहे घेरा हजार
हमरा मालिक के बचवन बा फूल गुलाब
हमरा माटी में काहे ना उगे फूल गुलाब
सड़किया किनारे सजल बा सुंदर बजार
फुटपाथ पर देख बचपन बिकाला हमार
केकरा से आस लगाई बताव सयान
कि जिनगी में कधिया ले आयी बिहान
मोट मोट अंखियन से पूछेला बबुआ हमार
कधिया ले धोये पड़ी होटल के गिलास
