मुटठी भर राख निकली
तेरी यादों की एक रात से
कटघरे तक जा पहुंचे हम
बात निकली जब एक बात से
July 26, 2008
जो हाथ न उठा सके वे उंगलियां उठा बैठे
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तेरी यादों की एक रात से
कटघरे तक जा पहुंचे हम
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